Rahu Upasna

ज्योतिष में राहु दुष्परिणाम देने वाले ग्रहों में से एक है, फिर भी इसका अपना एक अलग महत्वपूर्ण स्थान है। आमतौर पर राहु जातक के जीवन में बुरे परिणाम देने के लिए कुख्यात  है। इसके बावजूद राहु की अपनी विशेषता है। यदि किसी जातक के जीवन में यह शुभ स्थान पर हो, तो उसे जीवन में सफलता, विलासिता और कई अन्य सुखद परिणाम देता  हैं। ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह कहा गया है, जिसका अर्थ है कि अन्य ग्रहों की तरह इसका कोई भौतिक स्वरूप नहीं है। इस रूप में होने के बावजूद इसके दुष्प्रभाव सबसे भयावह हैं। जनमानस न्याय के देवता शनि से जितना डरते है उतना ही  राहु  से भी डरते है और डरे भी क्यों नहीं  राहु को दैत्यों का सेनापति जो कहा गया है।  यह अनिष्टकारी विनाशकारी है, लेकिन ज्योतिषशास्त्र के अनेक ग्रंथों में इन्हें आध्यात्मिक ग्रह के रूप में भी वर्णित किया गया है। इनके शुभ प्रभाव से सभी प्रकार की भौतिक उपलब्धियां, सांसारिक प्रतिष्ठा, वैभव, प्रशासनिक कार्यों में कुशलता, राजनीति-कूटनीति में सफलता उत्तम स्वास्थ्य तथा सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है। अशुभ प्रभाव के परिणाम स्वरूप ये भौतिकता की कमी तो करते ही हैं प्राणियों को व्यर्थ में कोर्ट कोर्ट कचहरी के मामलों में उलझाए रहना, गलत लोगों की संगति करना और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं लाते हैं। व्यक्ति धनाढ्य परिवार में जन्म लेकर भी विपत्तियों का सामना करता है।

राहु को लालची ग्रह भी कहते है. जिस व्यक्ति की कुंडली में राहु अशुभ होता हैं. वह व्यक्ति अपना अच्छा –बुरा कुछ नहीं समझ पाता है. वह लालच का शिकार होता जाता है. उसे अपने स्वार्थ के सिवा कुछ नहीं दिखाई देता है। राहु अच्छी बुरी स्थिति को समझने की शक्ति ख़त्म कर भ्रम पैदा करता है. ज्योतिष के अनुसार, जिनकी कुंडली में राहु की स्थिति अशुभ होती है और राहु जब अपना प्रभाव डालना शुरू करते हैं तो व्यक्ति बुरी आदतों का शिकार हो जाता है. उनकी संगत बुरे लोगों के साथ हो जाती है. वह यह भी जानते  है कि वह गलत कर रहा है लेकिन वह भ्रमित होकर वही कार्य करते है.

कुंडली में राहु दोष होने से मानसिक तनाव बढ़ता है. इसके अलावा आर्थिक नुकसान, तालमेल की कमी और अन्य ग्रहों का अशुभ प्रभाव पड़ने लगता है. कहा जाता है कि राहु का शुभ प्रभाव व्यक्ति को रंक से राजा बना देता है, वहीं इसका अशुभ फल मिलने से व्यक्ति राजा से रंक बन जाता है.

राहु ग्रह भगवान भैरव देव का प्रतिनिधित्व करता है. ज्योतिष शास्त्र में राहु को एक पापी ग्रह माना गया है जो जीवन में बाधाएं पैदा करता है. कुंडली के राहु जातकों को शुभ और अशुभ दोनों ही परिणाम देता है. कुंडली में राहु और केतु के कारण काल सर्प दोष का योग बनता है. 

राहु को क्रूर ग्रह माना गया है जो की कठोर वाणी , जुआ दुष्कर्म त्वचा रोग धार्मिक यात्राएं आदि के बारे में बताता है , शास्त्रों के अनुसार कुंडली में अगर राहु अशुभ स्थान में बैठा हो , कमजोर हो या पीड़ित हो तो  वह जातक को नकारात्मक परिणाम देता है , वैसे तो ज्योतिष में राहु को किसी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है लेकिन मिथुन राशि में उच्च के होते है और धनु राशि में

वैदिक ज्योतिष के ‘कालसर्प योग’ के अंतर्गत सभी ग्रह राहु-केतु दोनों ग्रहों से घिरे रहते हैं। ये एक अशुभ योग माना जाता है जिसके परिणाम स्वरूप जातक के जीवन में सर्वाधिक उतार-चढ़ाव रहता है। कालसर्प योग में फंसा जातक जन्म कुंडली में अनेक शुभ ग्रह स्थिति के होते हुए भी सर्वदा आंतरिक हीनता से दुखी रहता है। परंतु फिर भी उसमें अहंकार की मात्रा अधिक होती है। इस योग का प्रभाव शुभ हो तो व्यक्ति सामान्य और निर्धन परिवार में भी जन्म लेकर जीवन के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचते हैं और अपने सभी संकल्प पूर्ण करते हैं।

अपनी जन्म कुंडली के अनुसार किसी भी ग्रह के उपाय करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसकी शक्ति बढ़ानी है या उसके दुष्प्रभाव कम करना हैं। जन्म कुंडली में यदि कोई ग्रह शुभ भाव में हो किंतु कमजोर हो अथवा बाल्या-वृद्धावस्था में हो तो उसकी शुभता की वृद्धि के लिए उससे संबंधित रत्न धारण करना चाहिए। किंतु कोई भी ग्रह यदि जन्म कुंडली में अशुभ भाव में है तो उसके लिए वैदिक अथवा पौराणिक मंत्रों के जाप करने अथवा करवाने चाहिए और शांति करवाना बेहतर रहता है। तो अब जानते राहु के मन्त्रों के बारे में

राहु का पौराणिक मंत्र
ऊँ अर्धकायं महावीर्य चन्द्रादित्यविमर्दनम:। सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्। ॐ रां राहवे नम:।

तांत्रोक्त मंत्र- ऊँ ऎं ह्रीं राहवे नम:।
बीज मंत्र : ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:।

नाम मंत्र : ऊँ ह्रीं ह्रीं राहवे नम:। 

राहू का गायत्री मंत्र
ॐ शिरोरूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो राहू: प्रचोदयात्।

अगर आपका राहु अशुभ है तो आप यह मंत्र जाप तो एक एक माला कर ही लीजिये इससे आपको जरूर फायदा होगा और दान भी करते है तो यह सोने पे सुहागा होगा  राहु ग्रह से सम्बंधित दान में जौ, गेहू चावल तिल कंगनी उड़द और मूंग है का दान , भूरे रंग के वस्त्र का दान , गोमेद रत्न का दान , काला उड़द अथवा मूंग की दाल, सीसा, कालाघोड़ा, ताम्रपात्र, तेल, नीलेवस्त्र, नारियल तथा कंबल आदि का दान करना चाहिए। इसके अलावा पीपल, शीशम, कदम्ब, जामुन और नीम का वृक्ष लगाने से भी राहु जनित दोषों से छुटकारा पाया जा सकता है। राहु के दोष को जड़ मुक्त करने का एक और उपाय है की काले कुत्ते को रोटी खिलाई जाये , प्रतिदिन एक या दो रोटी खिलाने से राहु की अशुभता थोड़ी कम होने लगती है , इसके अलावा आप गोमेद रत्न भी धारण कर सकते है , लेकिन रत्न ज्योतिषीय परामर्श के उपरांत ही पहने। अगर आप राहु की साधना करने में सक्षम नहीं है तो हम आपकी और से यह शुभ कार्य कर सकते है इसके लिए एक संकल्प लेना होता है जैसे फॉर्म भरेंगे, संसथान से आपको संपर्क करके आगे की प्रक्रिया समझा दी जाएगी और साधना प्रारंभ हो जाएगी , इसमें बीज मंत्रो का २१००० जाप है, राहु के मंत्रो का अनुष्ठान एक हवन के साथ संपन्न होता है जिसकी रिकार्डिंग आपको भेज दी जाती है और आपको प्रसाद आपके पते पर पोस्ट कर दी जाती है।  

अगर आपको अनुष्ठान करवाना है तो निम्न फार्म भर दीजिये और प्रतीक्षा करिये संसथान की और से आपसे संपर्क किया जायेगा।

Amount : 5100/-

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