Mangal Upasna

मंगल  ग्रह को नवग्रहों का सेनापति कहा गया है। मंगल को पृथ्वी का पुत्र कहा गया है ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव का अंश पृथ्वी पर गिरने से मंगल देवता का जन्म हुआ । मंगल ग्रह का रंग लाल होता है इसलिए हमारे शरीर में जितने भी रक्त प्रधान अंग है उनका संबंध भी मंगल ग्रह से माना जाता है । जिन लोगों की कुण्डली में मंगल ग्रह निम्न स्थान में होता है या मंगल दोष आ जाता है, उन्हें रक्त संबंधी रोग और विकार आने लगते हैं। बलि मंगल होने पर विवाह, भूमि, संपत्ति, सेहत, धन आदि का सुख प्राप्त होता है. साधक के भीतर साहस, बल, का संचार होता है.मानव शरीर में मंगल का प्रभाव रक्त, मज्जा, यकृत, होंठ, पेट, छाती एवं हाथ पर होता है. विवाह के समय मंगल को जरूर देखा जाता है , अगर वर वधु में से कोई एक मांगलिक है तब विवाह स्वीकृत नहीं किया जाता है, मांगलिक की  स्तिथि में दोनों ही मांगलिक होने चाहिए , अन्यथा विवाह विच्छेद डाइवोर्स हो सकता है या अगर साथ रहते भी तो मन साथ नहीं रहता मतलब दोनों में अनुराग नहीं रहता है। 

मंगल मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है. मंगल मकर राशि में उच्च के और कर्क राशि में नीच के माने गए हैं. मंगल को क्रूर ग्रह माना गया है. इसकी महादशा सात वर्ष की होती है. जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल कमजोर होता है, उसमें अक्सर साहस और पराक्रम का अभाव होता है, आत्मविश्वास की कमी रहती है, रक्त सम्बन्धी बीमारी हो सकती है जैसे हीमोग्लोबिन कम हो गया थेलिसिमिया की बीमारी हो गई, कब्जियत या अपच की शिकायत रह सकती है ऎसे लोगों के विवाह में देरी हो जाती है और विवाह में भी कई अड़चनें आती हैं और वैवाहिक  जीवन में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।व्यक्ति पर कर्जा बहुत हो जाता है, हो सकता है की कोर्ट केस भी चले.

कुण्डली में व्याप्त मंगल दोष को समाप्त करने के लिए सबसे सरल उपाय है, मंगल ग्रह के मंत्रों का जाप करना

मंगल ग्रह के मंत्र है :-

मंगल ग्रह का प्रार्थना मंत्र

‘ॐ धरणीगर्भ संभूतं विद्युतकान्ति समप्रभम।

कुमारं शक्ति हस्तंतं मंगलं प्रणमाम्यहम।।’

मंगल गायत्री मंत्र

ॐ क्षिति पुत्राय विदमहे लोहितांगाय

धीमहि- तन्नो भौम: प्रचोदयात।

मंगल ग्रह का वैदिक मंत्र

-ॐ हां हं स: खं ख:

-ॐ हूं श्रीं मंगलाय नम:

-ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:

मंगलकानाममंत्र

ॐ अं अंगारकाय नम: ॐ भौं भौमाय नम:”

मंत्र भले ही अलग अलग हो पर साधना हर मंत्र से मंगल की होती है केवल प्रार्थना मंत्र ही की प्रतिदिन १ माला करने लग जाये तो कुछ ही दिनों में असर दिखने लग जायेगा. मंगल अगर अति कमजोर है मतलब पूर्ण रूप से आत्मविश्वास खो चुके है साहस नहीं है तब वैदिक मंत्र और नाम मंत्र की 1-1 माला कर लेनी चाहिए.

कुंडली में यदि लग्न यानि प्रथम भाव ,चतुर्थ भाव , सप्तम भाव ,अष्टम भाव एवं द्वादश भाव में मंगल दोष   होता है तब कुण्डली में व्याप्त मंगल दोष नियत्रण में रखने या मंगल को मजबूत करने के कुछ आसान उपाय , इन उपायों को करने से आपको कुछ ही समय में आभास होने लगेगा की आपमें दिन प्रतिदिन बदलाव आ रहा है

  1. मंगलवार के दिन गेहूं, गुड़, तांबा, मसूर, लाल चंदन आदि लाल रंग की वस्तुओं का दान करें.
  2. मंगलवार का व्रत रखें व मंगलवार के दिन नमक न खाये ।
  3. मूंगा धारण कर लीजिये (इसे हमेशा तांबे या सोने में जड़वा कर मंगलवार के दिन विधि- विधान से पूजन कर के धारण किया जाता है. इसे दाहिने हाथ की अनामिका अंगुली में पहनना चाहिए)

मंगलवार का दिन श्री राम के परम भक्त हनुमानजी को समर्पित है मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा का विधान है.  सच्चे श्रद्धा से बजरंगबली का ध्यान लगाने से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. हनुमान जी को बल, बुद्धि और विद्या का दाता कहा जाता है. हनुमान जी का सुमरन करने से सभी बिगड़े काम बन जाते हैं अगर आप मंगल गृह से परेशान है तब हनुमानजी को साध लीजिये मंगल अपने आप सध जायेगा, अब जानिए हनुमान जी की साधना कैसे करनी है

मंगल गृह क्रूर है लेकिन उसी क्रूरता की वजह से कई मांगलिक सेना में , रक्षा विभाग में , पुलिस में और उच्च प्रशाशनिक सेवा में रहते है, और यह यहाँ सफल भी रहते है, इनका आत्मविश्वाश प्रबल रहता है साहसी रहते है , निर्भीक रहते है  यह मंगल का ही प्रताप है , अगर आपका मंगल कमजोर है बात बात में आपको गुस्सा आता है , डरपोक है , विवाह नहीं हो रहा , कम उम्र में बहुत सी बीमारिया हो गयी है तब आप मंगल की साधना प्रारम्भ कर दीजिये कुछ ही दिनों  में आपका आत्मविश्वास सातवे आसमान पर होगा आप साहसी हो जाओगे, अगर आप मंगल उपासना स्वयं से नहीं कर पा रहे तो संसथान में कार्यरत पंडित जी आपकी और से यह उपासना करेंगे इसमें  बीज मंत्रो का २१००० जाप है, यह मंगल के मंत्रो का अनुष्ठान एक हवन के साथ संपन्न होता है जिसकी रिकार्डिंग आपको भेज दी जाती है और आपको प्रसाद आपके पते पर भेज दी जाती है। 

अगर आपको अनुष्ठान करवाना है तो निम्न फार्म भर दीजिये और प्रतीक्षा करिये संसथान की और से आपसे संपर्क किया जायेगा।

Amount : 5100/-

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