Guru Upasna

हिंदू धर्म में नवग्रह यानि नौ ग्रह का बहुत महत्त्व है। ज्योतिष के अनुसार ये नौ के नौ ग्रह जातक की जन्म कुंडली पर पूरा असर डालते हैं। जिन पर इन ग्रहों का असर शुभ होता है उसकी नैय्या तो पार हो जाती है, परंतु वहीं अगर किसी जातक पर इसका बुरा प्रभाव पड़ जाए तो उसकी किस्मत ऐसी पलटी खाती है कि इंसान कब राजा से रंक बन जाता है उसे पता नहीं चलता। नवग्रहों में बृहस्पति को देवताओं का गुरु कहा गया है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु का बड़ा महत्व होता है। जन्मकुंडली में गुरु (बृहस्पति) यदि बलवान है तो व्यक्ति ज्ञान, सत्कर्म, ईमानदारी, विद्या, बुद्धि, प्रसिद्धि और संपदा के मामले में श्रेष्ठ होता है, लेकिन यदि गुरु कमजोर हो तो व्यक्ति का जीवन संकटपूर्ण रहता है।

बिना कुंडली दिखाए अगर आपको जानना है की आपका बृहस्पति कैसा है बलवान है या कमजोर है तब यह लक्षण देख लीजिये अगर हो तो कमजोर है नहीं है तो बलवान है

  1. बुद्धि और ज्ञान की कमी :- कही पर कैसी भी बात करने वाला बिना सर पैर वाली, बिना सोचे समझे बोलने वाला बोलने के पश्चात सोचने वाला अरे यह क्या बोल दिया !!
  2. लिवर और पेट संबंधी रोग होना :-एसिडिटी या अपच होना, पेट सम्बन्धी बीमारी अधिकांशत: रहना
  3. विवाह में देरी या अड़चन आना :-विवाह में देरी के लिए गुरु ही सबसे अधिक जिम्मेदार होता है
  4. रूखी-सूखी त्वचा :- कोशिश करने के बाद भी त्वचा में रूखापन
  5. बार-बार बीमार होना :-ऋतू बदलने पर बीमार होना और बीच- बीच में भी कोई नई बीमारी से ग्रसित रहना
  6. कमजोर पारिवारिक जीवन :-प्रतिदिन के झगडे कहा सुनी होना ना पत्नी से बनना और ना ही माता पिता से
  7. बहुत ज्यादा गुस्सा आना :- बात बात पर गर्म हो जाना गुस्से में किसी को कुछ भी कह देना
  8. जीवन में स्थायित्व का अभाव :- एक जगह बैठ कर नौकरी नहीं कर पा रहे है बार बार बदलनी पड़ती है या आपका ट्रांसफर होता रहता है ।
  9. विवाहेत्तर संबंध 🙁 extra marital affair) किसी तीसरे की वजह से आपका दांपत्य जीवन में दरार आ जाना

इन सभी दोषो की एक दवा है गुरु की साधना, बृहस्पति की विधि विधान से पूजा और उनके मंत्र जाप, मंत्र है :-

गुरु का बीज मंत्र :

ॐ बृं बृहस्पतये नमः।।

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।

गुरु का पौराणिक मंत्र :

ॐ देवानां च ऋषीणां गुरुं कांचनसन्निभम।

बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्।।

गुरु का गायत्री मंत्र :-

ऊं अंशगिरसाय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नो जीव: प्रचोदयात्।

आप अपनी राशि में गुरु की स्थिति को मजबूत करने के लिए हर रोज पूजा के समय इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं। विशेषकर गुरुवार के दिन इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी होता है। आप इसे अपनी क्षमता और एकाग्रता के अनुसार कर सकते हैं। कम से कम एक माला जरूर जाप करें, और माला रुद्राक्ष या हल्दी की गांठ की हो , चूँकि पीला रंग बृहस्पति का प्रिय है इसलिए यदि मंत्र जाप हल्दी की गांठ की माला से की जाये तो अधिक लाभकारी रहेगी

गुरु की मजबूती के लिए अन्य उपाय

  • गुरुवार का व्रत रखना प्रारंभ करें (शुक्लपक्ष के गुरुवार से प्रारम्भ करें)
  • तर्जनी ऊँगली में स्वर्ण जड़ित पीला पुखराज धारण करें
  • किसी मंदिर में हल्दी या पीला अनाज का दान करें, या किसी वृद्ध को या जो भिक्षा से गुजर बसर करते हो उनको बेसन, पीले वस्त्र  केशर , शहद , बेसन के लड्डू , हल्दी की गाठे दान करें 
  • वृद्ध और निशक्त लोगों की सेवा करें
  • गुरुवार के दिन पीले वस्त्र धारण करना
  • अपने साथ हमेशा पीला रंग का रूमाल रखना
  • अपने गुरु, का सम्मान करें आदर करें (कभी उनसे कुछ गलत बोला हो तो क्षमा भी मांग ले)
  • गुरुवार के दिन गाय को गुड़ और चना खिलाएं
  • हमेशा मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं

     

गुरु ग्रह शुभ ग्रह है अगर ग्रह बलवान है तो वकालात, न्यायाधीश, नोटरी या इससे सम्बंधित कार्य करता है, या धार्मिक कार्यों से धनार्जन करते है, और यह यहाँ सफल भी रहते है, इनका आत्मविश्वाश प्रबल रहता है साहसी रहते है , निर्भीक रहते है  यह बृहस्पति का ही प्रताप है , अगर आपका गुरु कमजोर है बात बात में आपको गुस्सा आता है , जीवन में स्थायित्व की कमी , शादी में देरी या शादी में अड़चन आना, कम उम्र में बहुत सी बीमारिया हो जाना तब आप बृहस्पति की साधना प्रारम्भ कर दीजिये कुछ ही दिनों  में आपका आत्मविश्वास शिखर पर होगा। बृहस्पति देवताओ के गुरु है अगर थोड़ा कष्ट दे रहे है तो आपके आने वाला समय को सुखमय करने के लिए।  एक शिस्य की तरह साधना करते रहिये देखिये गुरु की दृष्टि जरूर आप पर पड़ेगी फिर कुछ ही पल में आपका जीवन बदल जायेगा, आपका नजरिया बदल जायेगा।  अगर आप गुरु की साधन करने में सक्षम नहीं है तो हम आपकी और से यह शुभ कार्य कर सकते है इसके लिए एक संकल्प लेना होता है जैसे फॉर्म भरेंगे, संसथान से आपको संपर्क करके आगे की क्रिया समझा दी  जाएगी और साधना प्रारंभ हो जाएगी , इसमें बीज मंत्रो का २१००० जाप है, गुरु के मंत्रो का अनुष्ठान एक हवन के साथ संपन्न होता है जिसकी रिकार्डिंग आपको भेज दी जाती है और आपको प्रसाद आपके पते पर पोस्ट कर दी जाती है।       

अगर आपको अनुष्ठान करवाना है तो निम्न फार्म भर दीजिये और प्रतीक्षा करिये संसथान की और से आपसे संपर्क किया जायेगा।

Amount : 5100/-

Shopping Cart
Scroll to Top