Chandra Upasna
ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। पौराणिक शास्त्रों में सूर्य के समान चंद्रमा की भी प्रतिष्ठा मानी गई है। चंद्रमा शुभ फल प्रदान करने वाले ग्रहों में से हैं, इनकी मजबूत या कमजोर स्थिति सीधे व्यक्ति के मन को प्रभावित करती है। यदि चंद्रमा की स्थिति कमजोर रहती है तो व्यक्ति का मनोबल कमजोर होने लगता है मन अशांत रहता है और उसे मानसिक पीड़ा रहती है और वह मानसिक अवरोधों से ग्रस्त रहता है। जिससे व्यक्ति के मन में नकारात्मक विचार उत्पन्न होने लगते हैं। पुरे शरीर का नियंत्रण हमारे मन पर होता है हम क्या सोचते कैसे सोचते है अगर सोच नकारात्मक होगी तो व्यक्ति निंदनीय और घृणित कार्य भी कर सकता है । व्यक्ति का मन किसी भी कार्य में नहीं लगता, विचार दूषित होने लगते है , और दूषित होने पर व्यक्ति के संस्कार अपवित्र होने लगते है । इनसे उबरने का एक विधि है चंद्र उपासना
पौराणिक कथा के अनुसार चंद्र देव का विवाह दक्ष प्रजापति की २७ नक्षत्र कन्याओं से हुआ था, उसमे से रोहिणी अधिक रूपवती थी सो चंद्र देव का स्नेह भी रोहिणी पर अधिक रहता था ऐसी मान्यता है की बुध चंद्र देव और रोहिणी की संतान है , इन दोनों के स्नेह से रुष्ट होकर बाकि की २६ नक्षत्र कन्याओ ने अपने पिता दक्ष प्रजापति से गुहार लगाई , जिसके फलस्वरूप क्रोधित होकर उन्होंने चंद्र देव को क्षय रोग का श्राप दे दिया , भगवन विष्णु और भगवन शिव के मध्यस्थता की वजह दक्ष ने अपना श्राप वापस तो नहीं लिया लेकिन उसे सिमित कर दिया की चद्र का तेज कृष्ण पक्ष में क्षीण होता जाएगा अमावस्या पर तेज पूरी तरह गायब हो जाएगा लेकिन शुक्ल पक्ष में चंद्रमा का उद्धार होगा और पूर्णमासी को चंद्रमा का तेज पूर्ण रूप में दिखेगा। आशीर्वाद स्वरुप भगवन शंकर ने उन्हें अपनी जटाओ में धारण कर रखा है। इसलिए जो चंद्र भोले शंकर के शीश पर हो उसकी उपासना कभी व्यर्थ नहीं जाती है
चंद्र उपासना के विभिन्न मंत्र:-
चन्द्रमा का नाम मंत्र – ॐ सों सोमाय नम:।
चंद्र बीज मंत्र ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:, ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:। ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम:।
चंद्रमा का पौराणिक मंत्र– दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम। नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं ।।
चंद्रमा गायत्री मंत्र – ॐ भूर्भुव: स्व: अमृतांगाय विदमहे कलारूपाय धीमहि तन्नो सोमो प्रचोदयात्।
चंद्रमा का वैदिक मंत्र:
ॐ इमं देवा असपत्न सुवध्वं महते क्षत्राय महते
ज्यैष्ठयाय महते जानराज्यायेनद्रस्येन्द्रियाय।
इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश
एष वोमी राजा सोमोस्मांक ब्राह्मणाना राजा।।
अपनी श्रद्धानुसार किसी भी मंत्र का जाप एक रुद्राक्ष माला से बिना अशुद्धि के करना चाहिए। नाम मंत्र छोटा और आसान है इसे दैनिक दिनचर्या में शामिल कर सकते है, बीज मंत्र, पौराणिक मंत्र और चंद्रमा गायत्री मंत्र पूजा में शामिल कर सकते है , वैदिक मंत्र कठिन है बिना अशुद्धि के मंत्र जाप हो रहा हो तो ही करें।
आप ही अपनी नियमित क्रिया कलापो से जान सकते है की आपका चंद्र कमजोर है या बलि
- चंद्र मन के साथ माता का भी कारक होता है, अगर आपसे माता का अपमान तिरस्कार होता है तो चंद्र कमजोर है
- आप अधिक भावुक है जल्द भावनाओ में बह जाते है तो चंद्र कमजोर है
- घर में क्लेश झगडे होते है और आपकी सहभागिता भी रहती है तो चंद्र कमजोर है
- आत्महत्या के विचार आते हो तो चंद्र कमजोर है
- ह्रदय रोग या मिर्गी से ग्रसित हो चंद्र कमजोर है
यह कुछ लक्षण है जिनसे आप स्वय पहचान सकते है आप का चंद्र बलि है या कमजोर
जिसका चंद्र बलहीन है उसे चंद्र को अर्ध्य देने का ही विधान है, यह अर्ध्य पूर्णिमा को ही देना चाहिए क्योंकि उसी रात चंद्र पूरा उदय होता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने का मंत्र है।
एहि चन्द्र सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते । अनुकम्प्यम माम देव ग्रहाण अर्घ्यम सुधाकर:।। सुधाकर नमस्तुभ्यम निशाकर नमोस्तुते।
क्षीरोदार्णवसम्भूत अत्रिगोत्रसमुद् भव ।
गृहाणार्ध्यं शशांकेदं रोहिण्य सहितो मम ।।
- पूर्णिमा की रातचंद्र उदय के बाद चांदी के लोटे से चंद्र को जल ,दूध ,मिश्री और सफेद पुष्प और सफेद चन्दन का अर्घ्य अर्पित करें। …
- पूर्णिमा पर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। .
- रुद्राक्ष की एक माला से १०८ चंद्र मंत्र जाप करना चाहिए..
- पूर्णिमा पर चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को कच्चे दूध में मिश्री और चावल मिलाकरअर्घ्य अर्पित करें।
- इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करें एवं महामृत्युंजय की भी एक माला करनी चाहिए ।
कुछ उपाय जिनके द्वारा हम अपने बलहीन चंद्र को बलि कर सकते है , विधि के विधान को नहीं बदला जा सकता है , पर इन उपाओ से हम उसका असर कुछ हद तक कम कर सकते है और चंद्र को बलि कर सकते है
उपाय :-
१ :- पूर्णिमा और सोमवार का व्रत रखें।
२:- भगवन शंकर का प्रतिदिन रुद्राष्टाध्यायी से अभिषेक करें, (प्रतिदिन ना कर सके तो हर सोमवार को करें और रुद्राष्टाध्यायी से ना कर सके शिव महिम्न स्तोत्र से करें। अभिषेक करें जरूर )
३:- सफेद अनाज दान करें। (जैसे चावल आदि )
४ :- चांदी अंगूठी या चैन पहने।
५ :- पूर्णिमा पर चंद्र को अर्ध्य दे।
चन्द्रमा में इतनी शक्ति होती है की जब पूर्णिमा आती है तो समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है, क्योंकि चंद्रमा समुद्र के जल को ऊपर की ओर खींचता है। मानव के शरीर में भी लगभग 85 प्रतिशत जल रहता है। शोध के अनुसार पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का प्रभाव काफी तेज रहता है व्यक्तियों के न्यूरॉन सेल्स क्रियाशील होने की वजह से वे अधिक उत्तेजित और भावुक हो जाते है, प्रत्येक पूर्णिमा पर ऐसा होने से उनके स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ता है, इनमे से कुछ भावुकता में आकर आत्महत्या तक कर लेते है। चंद्रमा की उपासना करके यह टाला जा सकता है, अगर आप चन्द्र उपासना स्वयं से नहीं कर पा रहे तो संसथान में कार्यरत पंडित जी आपकी और से यह उपासना करेंगे इसमें चन्द्रमा के बीज मंत्रो का २१००० जाप है, यह चन्द्रमा मंत्रो का अनुष्ठान एक हवन के साथ संपन्न होता है जिसकी रिकार्डिंग आपको भेज दी जाएगी और प्रसाद आपके पते पर भेज दी जाएगी , जिसे आपको आपको अपने बंधू बांधवो के साथ ग्रहण करना है।
अगर आपको अनुष्ठान करवाना है तो निम्न फार्म भर दीजिये और प्रतीक्षा करिये संसथान की और से आपसे संपर्क किया जायेगा।
Amount : 5100/-
