Ketu Upasna
केतु वैदिक ज्योतिष के नौ ग्रहों (नवग्रह) में से एक है। यह एक छाया ग्रह है, जिसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता, लेकिन इसका ज्योतिषीय दृष्टिकोण से गहरा प्रभाव होता है। केतु को दक्षिणी चंद्र ग्रहण बिंदु (साउथ लूनर नोड) के रूप में जाना जाता है और यह राहु के साथ मिलकर काम करता है। राहु और केतु दोनों को मिलाकर ग्रहणों का कारण माना जाता है। केतु मुख्य रूप से आध्यात्मिकता, मोक्ष और कर्म के प्रभावों का प्रतीक है। केतु को बिना सिर वाले शरीर के रूप में दर्शाया जाता है, जो उसके भौतिक पहचान से अलग होने का संकेत देता है। यह दर्शाता है कि व्यक्ति को भौतिक सुखों से विरक्त होकर आध्यात्मिक मोक्ष की ओर अग्रसर होना चाहिए।
वैदिक ज्योतिष में, केतु को एक क्रूर ग्रह माना जाता है, लेकिन इसका प्रभाव भौतिक से अधिक आध्यात्मिक होता है।। यह ग्रह मुख्यतः निम्नलिखित विषयों को दर्शाता है:
आध्यात्मिकता और मोक्ष (Spirituality & Moksha)
- केतु आध्यात्मिक मुक्ति, आंतरिक ज्ञान और भौतिक संसार से विरक्ति का प्रतीक है। यह जीवन के गहरे अर्थ को खोजने की दिशा में प्रेरित करता है और भौतिक सुखों से अलगाव का कारण बनता है।
- केतु का प्रभाव व्यक्ति को आत्म-विश्लेषण और आत्मनिरीक्षण की ओर ले जाता है, जिससे व्यक्ति भौतिक इच्छाओं के बजाय आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है।
पूर्व जन्म के कर्म (Past Life Karma)
- केतु का संबंध पिछले जन्मों के कर्मों से है। जन्म कुंडली में केतु की स्थिति यह दर्शाती है कि व्यक्ति को अपने पिछले कर्मों के परिणामों का सामना करना पड़ेगा।
- केतु की ऊर्जा अक्सर अप्रत्याशित घटनाओं और चुनौतियों के रूप में प्रकट होती है, जिनका उद्देश्य व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास को आगे बढ़ाना होता है।
रहस्यवाद और अंतर्ज्ञान (Mysticism & Intuition)
- केतु से प्रभावित लोग प्रायः मानसिक शक्तियों, अंतर्ज्ञान, और गूढ़ ज्ञान में रुचि रखते हैं। यह ग्रह रहस्यवाद, तंत्र-मंत्र, और गूढ़ विद्या का प्रतीक है।
- यह छिपे हुए ज्ञान, रहस्यों और ब्रह्मांडीय शक्तियों को नियंत्रित करता है।
स्वास्थ्य और शरीर के अंग (Health & Body Parts)
- केतु शरीर के निचले हिस्से, विशेष रूप से पैरों और आंतों को नियंत्रित करता है। यह तंत्रिका तंत्र और मानसिक ऊर्जा से संबंधित अचानक होने वाली बीमारियों का कारण भी बन सकता है।
व्यवसाय (Professions)
- केतु ज्योतिष, गूढ़ विज्ञान, शोध, चिकित्सा, और रहस्यमय विषयों में सफलता दिला सकता है। हालांकि, यह व्यक्ति को मुख्यधारा से अलग कर सकता है या समाज से अलगाव की ओर ले जा सकता है।
केतु की महादशा 7 वर्ष तक चलती है। इस अवधि में जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन और चुनौतियाँ आती हैं, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक जागरूकता की ओर ले जाती हैं। यह अवधि अलगाव, हानि और आत्मनिरीक्षण की हो सकती है, लेकिन अंततः आंतरिक शांति और मोक्ष की ओर ले जाती है।
केतु से प्रभावित व्यक्ति निम्नलिखित गुण प्रदर्शित कर सकते हैं:
- अत्यधिक आध्यात्मिक और दार्शनिक स्वभाव
- आत्मनिरीक्षण और भौतिक सुखों से दूर
- ज्योतिष, तंत्र, और गूढ़ विद्या में गहरी रुचि
- मानसिक शक्तियाँ और अंतर्ज्ञान की प्रबलता
- अचानक जीवन में परिवर्तन, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ या हानियाँ, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक विकास की ओर प्रेरित करती हैं
केतु एक क्रूर ग्रह माना जाता है, इसलिए इसके नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए विशेष उपाय किए जा सकते हैं:
- मंत्र: केतु का वैदिक मंत्र
ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे।
सुमुषद्भिरजायथा:।।
केतु का तांत्रिक मंत्र
ॐ कें केतवे नमः
केतु का बीज मंत्र
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः - जैसे केतु मंत्रों का जाप करने से इसके हानिकारक प्रभावों को कम किया जा सकता है।
- रत्न: लहसुनिया (कैट्स आई) रत्न धारण करना केतु के सकारात्मक प्रभावों को बढ़ा सकता है।
- दान और पूजा: कुत्तों को भोजन कराना, कंबल का दान करना, या केतु ग्रह शांति पूजा करना इसके प्रभावों को शांत करने में सहायक हो सकता है।
अगर आपका केतु अशुभ है तो आप यह मंत्र जाप तो एक एक माला कर ही लीजिये इससे आपको जरूर फायदा होगा और दान भी करते है तो यह सोने पे सुहागा होगा अगर आप केतु की साधना करने में सक्षम नहीं है तो हम आपकी और से यह शुभ कार्य कर सकते है इसके लिए एक संकल्प लेना होता है जैसे फॉर्म भरेंगे, संसथान से आपको संपर्क करके आगे की प्रक्रिया समझा दी जाएगी और साधना प्रारंभ हो जाएगी , इसमें बीज मंत्रो का २१००० जाप है, राहु के मंत्रो का अनुष्ठान एक हवन के साथ संपन्न होता है जिसकी रिकार्डिंग आपको भेज दी जाती है और आपको प्रसाद आपके पते पर पोस्ट कर दी जाती है।
अगर आपको अनुष्ठान करवाना है तो निम्न फार्म भर दीजिये और प्रतीक्षा करिये संसथान की और से आपसे संपर्क किया जायेगा।
नाम जन्म दिनांक
पता जन्म समय
Email id: जन्म स्थान
Amount : 5100/-
