Surya Upasna
धार्मिक शास्त्रों में सूर्य को एक प्रभावशाली ग्रह माना गया है. मुख्य पञ्च देवता में सूर्य को पाचंवा स्थान मिला है और नवग्रह में सूर्य पहले स्थान पर है इस तरह सूर्य देवता भी है और ग्रह भी है और इसलिए भी सूर्य को ग्रहों का राजा भी कहा जाता है. सूर्य ऊर्जा और आत्मा का कारक होता है . अगर कुंडली में सूर्य मजबूत स्थिति में है और शुभ ग्रहों से दृष्ट है तो ऐसे जातक राजा के समान होते हैं. सूर्य प्रधान व्यक्ति, को जीवन में उच्च पद की प्राप्ति होती है और मान-सम्मान मिलता है. सूर्य को मजबूत बनाए रखने के लिए पिता का सम्मान करना बहुत आवश्यक होता है। ज्योतिष के अनुसार जहां कुंडली में शुभ सूर्य आपको हर ओर से सफलता दिला सकता है तो वहीं कुंडली में अशुभ सूर्य के कारण पिता-पुत्रों के संबंधों में दरार आ सकती है। सूर्य से पीड़ित जातक को रक्तचाप, अस्थिरोग, नाखून, हृदय व नेत्र से संबंधित रोग हो सकते हैं। सूर्य के कमजोर होने पर आपके मान-सम्मान को ठेस लग सकती है इसलिए सूर्य का बलवान होना आवश्यक होता है। सूर्य को प्रतिदिन जल देने से जातक को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं, साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होते हैं. सूर्य देव की कृपा पाने और कुंडली में सूर्य की अनुकूलता बनाएं रखने के लिए प्रतिदिन सूर्य उपासना के साथ सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए. इससे आपको समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है, चेहरे पर तेज आने लगता है, रुके कार्य होने लगते है ।
सुबह उठने से लेकर संध्या या सूर्यास्त तक जा भी सूर्य की और देखें यह सरल मंत्र जरूर बोले। यह मंत्र पूजनीय है घर की सामान्य पूजा में ही इन मंत्रो का उपयोग होता है।
1 ॐ मित्राय नम:
2. ॐ रवये नम:
3. ॐ सूर्याय नम:
4. ॐ भानवे नम:
यह सात मंत्र सूर्य को जल चढ़ाते समय बोलने चाहिए। वैसे तो ॐ सूर्याय नाम ॐ आदित्याय नम से भी सूर्य को अर्ध्य दे सकते है , अगर कुंडली में सूर्य कमजोर है और आपको सूर्य बलवान करना है अपने आभामंडल को सूर्य की तरह तेजवान करना है तो यह मंत्र जरूर बोले अर्ध्य के समय मंत्र है :-
ॐ घृणिं सूर्य्य: आदित्य: नमोस्तुते
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा.
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर: नमोस्तुते
ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
ॐ सूर्याय नम:
ॐ घृणि सूर्याय नम:
सूर्य को अर्ध्य देते समय ध्यान रखने योग्य बातें :-
- सूर्य के उदय होने से पूर्व ही उठ जाये और स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. सूर्योदय से पूर्व या ठीक सूर्योदय के समय अगर अर्ध्य दे रहे है यह सबसे अच्छा विचार है,
- अर्ध्य देने का उपयुक्त स्थान जलाशय, तालाब या नदी होती है , अगर यह आपके समीप नहीं है तो साफ़ स्वच्छ जगह पर भी अर्ध्य दे सकते है, उपजाऊ मिट्टी में , किसी गमले में या तसला या कोई बर्तन ले ले जिसमे अर्ध्य का जल आ जाये , ध्यान रखियेगा अर्ध्य का जल आपके पैरों में नहीं गिरना चाहिए
- अर्घ्य देते समय सूर्यदेव की ओर न देखकर जल प्रवाह में सूर्य की किरणों की ओर देखें. सूर्य तेजवान ग्रह है उनसे आखे मिलाना शास्त्रोक्त सही नहीं है, जिस प्रकार आज भी कई घरो में अपने से बड़ो के सामने बोलने से डरते ही है पर उनसे आंखें भी नहीं मिलाते
- सूर्य को जल चढ़ाने के लिए तांबे के लोटे का उपयोग करना चाहिए. सूर्य को जल चढ़ाते समय आपके हाथ खुले होने चाहिए और अंगूठे लोटे को स्पर्श ना कर रहे हो
- अर्घ्य देते समय उपरोक्त सात मंत्रों का जाप करें अगर वह मंत्र याद नहीं है तो । ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ भास्कराय नम: मंत्रों का सात बार जाप करें.
रविवार के दिन सूर्य उपासना थोड़ी भिन्न होती है चूँकि रविवार सूर्य का दिन होता है इसलिए रविवार को सूर्य उपासना थोड़ी विस्तृत होनी चाहिए।
। रविवार के दिन केसरिया रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
२. जल दूध घी कुशा शहद लाल चन्दन लाल कनेर व गुड़ के साथ तांबे या चांदी के लोटे से अर्घ्य अर्पित करें और मन्त्रों का जाप भी करें। ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय नमोस्तुते ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ नमो भास्कराय नम:। अर्घ्य समर्पयामि।।
३ माणिक्य रत्न से सूर्य मजबूत होता है, इसलिए कुंडली में कमजोर सूर्य वाले जातक माणिक्य रत्न धारण करें.
४ आदित्य ह्रदय स्तोत्र प्रतिदिन पढ़ सकते है, पर रविवार को अवश्य पढ़े।
अगर सूर्य आपकी कुंडली अधिक प्रभावशाली नहीं है. तब ऊँ सूर्याय नम: का जाप आप मन ही मन कार्य आदि करते हुए भी कर सकते हैं इससे आपका सूर्य मजबूत होगा और भगवान सूर्य नारायण प्रसन्न होंगे
सूर्य के गायत्री मंत्र भी बहुत लाभकारी है इसे आप अपनी उपासना में शामिल कर सकते है , जैसे गायत्री मंत्र पड़ने वाला सर्वश्रेष्ठ उचाईयों तक पहुंच जाता है उसी प्रकार सूर्य के गायत्री मंत्र भी आपकी सभी कामना पूर्ण करने में सक्षम है निम्न दोनों मन्त्रों की एक एक माला भी अपने अगर कर ली तो ६ महीने में ही आपको असर देखने को मिल जायेगा , आपके चेहरे में तेज आ जायेगा , आप निर्भीक होकर बात करने लगेंगे वह मंत्र है
सूर्य गायत्री मंत्र
1.ऊँ आदित्याय विदमहे प्रभाकराय धीमहि तन्न: सूर्य प्रचोदयात् ।
2.ऊँ सप्ततुरंगाय विद्महे सहस्त्रकिरणाय धीमहि तन्नो रवि: प्रचोदयात् ।
गायत्री सूर्य मंत्र के अलावा सूर्य के एक पौराणिक मंत्र और एक वैदिक मंत्र है जिसके मंत्र जाप या सूर्योपसना से आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है
पौराणिक मंत्र – जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम। तमोsरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोsस्मि दिवाकरम।
वैदिक मंत्र – ॐ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यण्च । हिरण्य़येन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन।
सूर्य उपासना सूर्य मंत्र का जाप या सूर्य की शांति अगर उत्तरा फाल्गुनी उत्तराषाडा व् कृतिका में की जाये तो लाभ अवश्य मिलता है इसमें कोई संशय नहीं है .
इस पृथ्वी पर जीवन सूर्य से ही है। इसी को सर्वमान्य सत्य कहा गया है। जगत के कर्ता-धर्ता भी सूर्य को कही माना गया है सूर्योपनिषद में सूर्य को ही संपूर्ण जगत की उत्पत्ति का एक मात्र कारण बताया गया है। मुख्य पञ्च देवता में सूर्य का पाचंवा स्थान है और सूर्य एकमात्र प्रत्यक्ष देवता है , अन्य देवता के बारे में हमने सिर्फ पढ़ा है उन्हें देखा नहीं लेकिन सूर्य देव को हम देख सकते है, और कही न कही वो भी अपने भक्तो देख रहे होंगे, अगर हम मन से श्रद्धा से उनकी उपासना करते है तो बिना मांगे ही अपनी सारी मनोकामना वे पूर्ण करेंगे . तेजहीन व्यक्ति भी सूर्य उपासना से अपने तेज से सभी को प्रभावित करने लगते है . सूर्य को अर्ध्य देते समय ध्यान रखने योग्य बातें सारी लगते अगर आप सूर्य उपासना स्वयं से नहीं कर पा रहे तो संसथान में कार्यरत पंडित जी आपकी और से यह उपासना करेंगे इसमें सूर्य बीज मंत्रो का २१००० जाप है, यह सूर्य मंत्रो का अनुष्ठान एक हवन के साथ संपन्न होता है जिसकी रिकार्डिंग आपको भेज दी जाती है और आपको प्रसाद आपके पते पर भेज दी जाती है।
अगर आपको अनुष्ठान करवाना है तो निम्न फार्म भर दीजिये और प्रतीक्षा करिये संसथान के पंडित जी आपसे संपर्क करेंगे
Amount : 5100/-
