Shani Upasna
शनि को ज्योतिष शास्त्र में एक प्रभावशाली ग्रह माना गया है। नव ग्रहों में शनि को न्यायाधीश बताया गया है। इसके साथ ही शनि को कर्मफलदाता भी कहा जाता है। मान्यता है कि शनि ग्रह व्यक्ति को उसके अच्छे बुरे कामों का फल प्रदान करते हैं। हर व्यक्ति के द्वारा किये जाने वाले कार्य और उसके फल के पीछे शनि ही हैं. यानी जब व्यक्ति अच्छे कार्य करता है तो शनि देव उसे अच्छे और शुभ फल प्रदान करते हैं लेकिन जब व्यक्ति बुरे कार्य करता है, दूसरों को सताता है तो वह कर्म दोष का भागी बन जाता है और फिर शनि देव उसे कष्ट देना शुरू कर देते हैं. व्यक्ति की आजीविका, रोग और संघर्ष शनि के द्वारा ही निर्धारित होते हैं. शनि की जब दशा अन्तर्दशा के साथ साढ़े साती और ढैय्या आरंभ होती है तो शनि देव व्यक्ति के जीवन में काफी उथल-पुथल लाते हैं।
व्यक्ति की दिनचर्या के हिसाब से की उसका शनि कैसा है उसे लाभ दे रहा है या हानि या निम्न वजहों से आप जान सकते है :-
- व्यक्ति को अचानक शारीरिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़े तब आपका शनि बलि है
- शनि दोष होते ही व्यक्ति के जीवन में अचानक काम का बोझ बढ़ जाता हैऔर न चाहते हुए भी इन अवांछनीय कार्यों को करना पड़ता है।
- जब शनि की साढ़े साती ढैय्या या शनि बलि होने लगता है व्यक्ति को अधिक गुस्सा आने लगता है, झगड़ालू या चिड़चिड़ा हो जाता है बात बात पर बहस करने लग जाता है । धर्म से जुड़े कामों को करने में आनाकानी करने लगता है, साथ ही बुरी आदतों का शिकार हो जाता है।
- शनि के अशुभ प्रभाव शुरू होते ही व्यक्ति किसी न किसी मामलों में फंस जाता है। जिसके कारण मान-सम्मान की क्षति होती है।
- शनि के अशुभ प्रभाव शुरू होते ही व्यक्ति को कुत्ता या अन्य हिंसक या पालतू जानवर काट सकता है, इसमें लम्बे समय तक तकलीफ रह सकती है
- शनि के अशुभ प्रभाव से नौकरी में अड़चन आने लगती है, आपकी आपके अधिकारी से नहीं बनेगी जबकि पहले बनती रहती थी इस वजह कई बार नौकरी तक से हाथ धोना पड़ सकता है ।
शनि को प्रभावहीन करने के लिए या शनि को अपने समर्थन में लेने के लिए कुछ उपाय करने पड़ते है , जिससे शनि के कुप्रभाव थोड़े शिथिल पड़ जाते है, जो विधाता ने आपके भाग्य में लिखा है वो तो भोगना ही है , शनि की उपासना साधना से वो कष्ट की समयावधि थोड़ी कम हो जाती है या बिलकुल समाप्त हो हो जाती है । निम्न है वह चमत्कारिक मंत्र जिनके मंत्र जाप से कुछ ही दिनों में लाभ दिखने लगता है।
- शनि का वैदिक मंत्र :- ॐ शन्नो देवी रभिष्टय आपो भवन्तु पीपतये शनयो रविस्र वन्तुनः।
- शनि देव का बीज मंत्र :- ॐ शं शनैश्चरायै नम:, ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:
- शनि का पौराणिक मंत्र :- ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
- शनि गायत्री मंत्र :- ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्।
- शनि महामंत्र :- ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
शनि को निर्बल करने के कुछ उपाय
छाया दान : शनिवार के दिन एक लोहे की कटोरी में सरसों का तेल लें,और इसमें अपना चेहरा देख लें। इसके बाद इस तेल को शनि मंदिर में दान कर दें। ऐसा कुछ शनिवार तक लगातार करने से शनि से जुड़ी समस्याएं काफी हद तक दूर हो जाती हैं। इसके अलावा रोटी पर सरसों का तेल लगाकर शनिवार के दिन काले कुत्ते को खिलाएं।
पीपल की पूजा : शनिवार के दिन सूर्योदय से पूर्व या सूर्यास्त के बाद पीपल की पूजा करने से आपके ऊपर शनिदेव की कृपा के साथ ही लक्ष्मी जी की कृपा भी बनी रहती है। साथ ही पीपल को भगवान श्रीकृष्ण ने अपना ही स्वरूप बताया है, शनिदेव भी भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त हैं। ऐसे में शनिवार के दिन पीपल की पूजा करने पर वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों के कष्ट दूर करते हैं।
दान : शनि को प्रबल करने के लिए आप कंबल, जूता, चप्पल, लोहा, काले कपड़े और नारियल जटा वाला दान कर सकते हैं. शनिवार को सरसों तेल, भैंस और काली गाय का दान भी उपयोगी होता है
हनुमानजी की उपासना : शनिदेव, हनुमानजी की पूजा करने वालों से सदैव प्रसन्न रहते हैं, इसलिए इनकी कृपा पाने के लिए शनि पूजा के साथ-साथ हनुमान जी की भी पूजा करनी चाहिए। अगर आप शनि देव की कृपा पाना चाहते हैं तो सूर्योदय या सूर्य अस्त के समय हनुमानजी का पूजन कर हनुमान चालीसा या सुंदर काण्ड का पाठ करें। सुन्दर कांड का पथ पतिदिन ना हो पाए तो हर शनिवार को कर लें
संबंध : अपने सम्बन्धो को सहेज कर रखें, पराई स्त्री से संबंध न रखें, माता पिता और अपनी पत्नी का सम्मान करें और बच्चो से प्रेम करें, गरीब और लाचार लोगों की मदद करें, सफाई करने वालों से अच्छा व्यवहार करें, स्वयं साफ-सफाई से रहें. इससे भी शनि ग्रह मजबूत होता है.
रत्न :- जिन लोगों का शनि कमजोर होता है, उन लोगों को नीलम पहनना चाहिए, यदि नीलम आपके लिए संभवन नहीं है, तो आप शनि ग्रह के उपरत्न जमुनिया, अकीक भी पहन सकते हैं. यह भी शनि ग्रह को मजबूत करेगा, लेकिन इसके लिए आप किसी योग्य ज्योतिषाचार्य की मदद लें तो अच्छा रहेगा.
मंत्र जाप :- रुद्राक्ष की माला से नियमित तौर पर शनि मंत्र जाप प्रारम्भ कर दे, और साथ में शनिवार का व्रत भी रखें
शनि कठोर है लेकिन निर्दयी नहीं है , शनि की सादे सiति ढैया जब समाप्त होने को होती है तब शनि आपके जीवन में कुछ अच्छा करके जाता है , या तो धन सम्पदा दिलवाता है या व्यापर नौकरी में फायदा दिलवाता है , शनि मंद गृह है धीमा चलता है अगर यह १२वे भाव में बैठा है या देख रहा है तो धीरे धीरे आपको कर्जदार बना देगा , अगर यह ६thवे भाव में बैठा है या देख रहा है तो धीरे धीरे आपको बीमार बना देगा और अगर यह 8thवे भाव में बैठा है या देख रहा है तो धीरे धीरे आपकी आयु कम कर देगा और मृत्य तुल्य कष्ट देगा, इसलिए अगर शनि देव के अशुभ फल आपको दिख रहे है या कुंडली में शनि अशुभ है तो मंत्र जाप और इनके उपाय जरूर करें, यह आपको लाभान्वित करेंगे, शनि आपको लेकर थोड़े नरम पड़ जायेंगे , ईश्वर में श्रद्धा रखकर विश्वास के साथ शनि के मंत्र जाप और उपाय करिये, देखिये शनि आपके मित्र बन जायेंगे। अगर आप शनि की साधना करने में सक्षम नहीं है तो हम आपकी और से यह शुभ कार्य कर सकते है इसके लिए एक संकल्प लेना होता है जैसे फॉर्म भरेंगे, संसथान से आपको संपर्क करके आगे की प्रक्रिया समझा दी जाएगी और साधना प्रारंभ हो जाएगी , इसमें बीज मंत्रो का २१००० जाप है, शनि के मंत्रो का अनुष्ठान एक हवन के साथ संपन्न होता है जिसकी रिकार्डिंग आपको भेज दी जाती है और आपको प्रसाद आपके पते पर पोस्ट कर दी जाती है।
अगर आपको अनुष्ठान करवाना है तो निम्न फार्म भर दीजिये और प्रतीक्षा करिये संसथान की और से आपसे संपर्क किया जायेगा।
Amount : 5100/-
